ये है हिंदुस्तान मेरी जान

भाई राजीव दीक्षित जी को समर्पित

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आनन्द प्रिय राहुल


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बेटे का सुख ?

Posted On: 17 Apr, 2013  
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व्यवहार बदलो, त्यौहार नहीं

Posted On: 3 Apr, 2013  
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किस बात की माफी ?

Posted On: 24 Mar, 2013  
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आज बेटियों और महिलाओं को तिरस्कृत करना समझ से परे है जबकि बेटियाँ प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रही हैं और जबकि युवाओं में दहेज प्रथा के खिलाफ ज़बरदस्त माहौल है तो ऐसे में दहेज भी बेटियों के लिए अभिशाप नहीं हो सकता। बेटी पर बेटे को तरजीह देने का मूल कारण ‘मानसिकता’ है। बेटे को आज़ादी और बेटी पर प्रतिबंध के कारण ही बेटों में नैतिकता का अभाव होता जा रहा है, जिस कारण उनमें अपराध की प्रवत्ति बढ़ रही है। यदि बेटियों की तरह बेटों को भी बचपन से कदम कदम पर नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाए तो यौन अपराधों को बड़े स्तर पर कम किया जा सकता है। जिस बेटे की अच्छी शिक्षा, अच्छी से अच्छी परवरिश के लिए माता-पिता अपनी पूरी ज़िंदगी धन जोड़ने में लगा देते हैं वही बेटा उनके बुढ़ापे को नर्क समान बनाने में कोई कसर नहीं छोडता है। ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जब माता-पिता की मृत्यु के बाद बेटे जायदाद और संपत्ति के लिए भाई भाई के खून के प्यासे हो जाते हैं। जबकि बेटियों को संपत्ति से ज्यादा माता-पिता से स्नेह होता है। फिर बेटों से किस सुख की आस में बेटियों की कोख में हत्या की जा रही है ? माता-पिता द्वारा धन संचय ना करने पर वही बेटा बुढ़ापे में ताना मारता है कि “तुमने मेरे लिए किया ही क्या है ?” और धन संचय ज्यादा हो जाए तो वही बेटा जान का दुश्मन बन जाता है। शायद बेटों कि इसी प्रवत्ति को भांपकर कबीर दास जी ने कहा था, पूत सपूत तो का धन संचय ? पूत कपूत तो का धन संचय ? स्वाभाविक और सरल बात को आपने बहुत प्रभावी ढंग से लिखा है ! शायद ये बात लोगों की समझ में आये !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: आनन्द प्रिय राहुल आनन्द प्रिय राहुल

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एक ओर भारत में लोग 12 से 15 रुपये की पानी की बोतल खरीदकर पानी पी रहे हैं दूसरी तरफ कत्लखाने लाखों करोड़ों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। एक कत्लखाने में प्रति पशु सफाई में औसतन 500 लीटर पानी बर्बाद होता है जबकि एक व्यक्ति को प्रतिदिन औसतन 25 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। क्या ये ‘राष्ट्रीय अपराध’ नहीं है ? एक आधिकारिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 36,031 लाइसेंसी कत्लखाने या बूचड़खाने हैं और हजारों बिना लाइसेंस के। एक नज़र बड़े बड़े कत्लखानों के आंकड़ों पर: . मुंबई में चेंबूर के निकट देवनार में स्थित ‘देवनार कत्लखाना’, एशिया का सबसे बड़ा कत्लखाना है। ये 126 एकड़ जमीन के विशाल क्षेत्र में स्थित है। देवनार में हर दिन लगभग 1000 बैल, गाय, भैंस और 6500 भेड़ और बकरियों की हत्या की जाती है। इस तरह यहाँ 18 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन खर्च होता है। वहीं आंध्र प्रदेश के हैदराबाद स्थित कत्लखाने अल कबीर एक्सपोर्ट लिमिटेड में 6 हजार 600 पशु प्रतिदिन काटे जाते हैं और प्रतिवर्ष 48 करोड़ लीटर पानी बर्बाद किया जाता है। हिन्दुस्तान टाइम्स के 09/04/1994 के अंक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता के मोरी गांव कत्लखाने में17 लाख 50 हजार लीटर पानी प्रतिदिन लगता है। सिर्फ इन तीन बड़े कत्लखानों को देखा जाए तो लगभग 3 लाख लोगों के उपयोग का पानी प्रतिदिन नष्ट कर दिया जाता है तो कल्पना परिए पूरे देश के हजारों कत्लखानों में पानी की कितनी बर्बादी होती होगी ?बहुत सार्थक , प्रभाई और जागरूक करता लेखन दिया है आपने श्री आनंद प्रिय राहुल जी !

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